ख़ामोशी

ये जो हम दोनों के बीच की खामोशियां है, बहुत बातें करती है
चलो लफ्ज़ों का इस्तेमाल करके बेचैनियों को ख़ामोश करें।

©Niishtha

रिवाज़



ये कहने सुनने की चाहतें, मेरा हर बात को तव्वजो देने की आदतें
चलो अब ये रिवाज़ खत्म करते है

ये रोज़ की शुभरात्रि और सुबह – ब – खैर करने के इंतजार की बातें
चलो अब ये रिवाज़ खत्म करते है

ये रोज़ का याद करना और मिलने की ख्वाहिशें
चलो अब ये रिवाज़ खत्म करते है

मेरे हर बात को बेबाक मन्न से बताना ,तुम्हारा हर बात को नजरअंदाज करने की हरकतें
चलो अब ये रिवाज़ खत्म करते है

ये प्यार जताने की ज़िद्द और ना निभाने की हसरतें
चलो अब ये रिवाज़ खत्म करते है

इस रिवाज़ में बंधकर ना जाने कितना स्वाभिमान को ठेस पहुंचा,
खुदगर्ज होकर ही सही,
चलो अब ये रिवाज़ खत्म करते हैं

©Niishtha

Stuck

Stuck between Past & Future
realising how can I count on someone
with so many regrets of past haunts
trying not to do same mistakes in future

Stuck between Black & White
realising how the grey area works for people
with so many blacks in everyone’s life
trying to keep my white clean

Stuck between Practicality & Emotions
realising how difficult to control feelings
with so many attachments to the emotional core
trying to keep my sanity with practicality

Stuck between Self love and Sacrifice
realising how everyone is happy because of you
with so many responsibilities around the corner
trying to keep some time for myself to feed my soul

©Niishtha

तम्मन्ना।।।

दिल को धड़कन दे मेरी कोई बात तू वो बन
ना बात कर बस, हो मुकम्मल साथ तू वो बन

बरसों से धोखा खाता आया है मन मेरा
अंधेरी रात में भी साथ दे, परछाई तू वो बन

औरों पर करते करते अब खुद पे भी यकीन टूटा
मुझे मुझमें जो वापिस दे यकीन, हमराज़ तू वो बन

छेद मेरी नाव के गिनते नहीं बनते
तूफ़ान से जो खुद को पार दे, मझदार तू वो बन

मुश्किल लगे गर तो मुझको छोड़ जा
किसी दिल से नफ़रत को मिटा दे, प्यार तू वो बन

©Niishtha

उम्मीद..।।।

जिन ख्वाबों को खुद तोड़कर सोए है हम
वो हर रात आकर मुझे जगाते क्यूं है

टूट जाती है कसम उसे भुलाने की हर बार
वो मेरी तरफ देखकर मुस्कुराते क्यूं है

रास्तों पर अलग अलग चलने का वादा करके
वो हर मोड़ पर मुझे  आज़माते क्यूं है

मुझे आवाज़ ना दे बस दो पल ठहर जाना तुम
लेकिन अब इतनी भी आस हम लगाते क्यूं है

तेरे जाने के बाद भी वक़्त गुज़रा है पर
ज़िन्दगी नाम है इसका, ये हम जताते क्यूं है

© Niishtha

आख़िर..।।।

देखते देखते ये तस्वीर भर आती है
तकते तकते ये रास्ते थक जाती है।
क्या करें ये आंखें आख़िर
रोते रोते ये बह जाती है।

देखे क्या क्या मंज़र इन्होंने
दिल में घुसते खंजर इन्होंने
क्या करें ये आंखें आख़िर
सागर देखे है पल में बंजर इन्होंने।

देखा है हर शक्स को बदलते हुए
हर रिश्ते को अपने कुचलते हुए
क्या करें ये आंखें आख़िर
देखा है अपने आप को जलते हुए।

देखा लहू को अपने से बहते हुए
हर सितम को खुशी से सेहते हुए
क्या करें ये आंखें आख़िर
देखा है खुद को मरते हुए।

©Niishtha

तन्हाई…!!!

ना जाने सहमा सा रहता है ये दिल
डर लगता है बिखर ना जाएं हम।

यूं तो कहते है जी पाएंगे तुम्हारे बिना
जब भी होते हो दूर सहम जाते है हम।

जब भी तुम्हारे खयालों में होते हैं
सुकूं मिलता है जी पाते है हम।

जब भी कोई पूछता है हाल ए दिल
जरा सा मुस्कुरा देते है हम।

वरना क्या है इस जहां में
जान होकर भी बेजान से रहते है हम।

©Niishtha





काश..।।।

काश तुम्हारी ज़िन्दगी में कुछ पल हमारा होता
काश हमसे पहले तुमने हमें पुकारा होता।

ज़िन्दगी का हिस्सा कहते है तुम्हें
काश इस दुनिया की नज़रों से तुम्हें चुराया होता।

हम भी रहते हर वक़्त तुम्हारे साथ
काश ख़ुदा ने कोई ऐसा खास रिश्ता बनाया होता।

रखते तुम्हें पलकों में छुपाकर
अगर कुदरत ने तुम्हें हमारा बनाया होता।

©Niishtha

Phoenix

Hollowness in the heart
Emptiness in the mind
Part of me says everything is fine

While healing every ache of those heart wounds
I still remember the way our relationship got pruned
Living without you and leaving everything behind
Entangled moments still wanders in wynd
Stop! Don’t come to see the darkness of this place
Abundance of this vicinity doesn’t fall in your space
This heart is learning to live without you
Filling the void with hope & peace like Morning dew
Behold! Look how brightness is eliminating the darkness
Look how happy I become….

~©Niishtha