Regret…!!!


Ohhh the seed of regret
don’t deceive the feelings with agony
These conundrum gives me disruption
should I laugh?
should I cry??
My Heart felt the darkness
sinking me in the emptiness
The suffocation I handle
makes me eager.. eager to know
the reason why??
Taking a chance on my feelings
twitching on the love to I gave faith
how do I cease my mind
from the daydreams
How do I tell my heart to be over
for it will be another failure

~Niishtha
13th Feb 2020

खुशी…!!!

ये कविता हर उस  छोटे बच्चे की मनोदशा को ज़ाहिर करती है , जो अपने हालातों और मजबूरियों के चलते ट्रेन/स्टेशन पर करतब दिखाते हैं, सड़कों पर सिग्नल पर सामान बेचते है.. इन सब हालातों के बावजूद किसी छोटी सी चीज़ में भी खुशी ढूंढ लेते है।

dedicating this poem to all child Labors.

देखो कैसे वो अपने आप से खुश है,
बेच कर अपना घर – बार वो खुश है।

हमें एक छत का प्यार मिल जाए,
वो कमरे की दीवार से खुश है।

अपनों का हाथ थामने में इतनी हिचक थी,
वो दो – चार अजनबियों के साथ से खुश है।

मां बाप भी इतने पराए हो गए,
के वो अपने सौतेले व्यवहार से खुश है।

आज हर किसी की नज़रों से वो गिर गए,
समझ कर इसी को संसार वो खुश है।

~Niishtha – 18th Oct 2012

Reminisce…!!!

Wandering in the corridor of our memories…
I found the layers of our relationship…
The way it has been grown and matured day by day.

I saw the painting hanging of our first date..
Curiosity in the heart to know each other…
With the affection and understanding we are creating one painting after another…

For the days, you held my hands and caress me where I found the comfortness in your lap..

I keep walking….

Found the one when we laughed and hugged each other….
where I felt the softness of your breath and Fragrance of you which still lingers in me…

there are many paintings …..

Painting of our Care& Conception, love & Compassion, Life & Lessons, Trust & Honesty, Dreams & Reality, Acceptance & Forgiveness, Emotions & Happiness…..

All these paintings…
They are filling the spaces of all those who have left the wall of my memory corridor…

~Nishtha

Not Available…!!!

if you want to complain all time, I am not available for you…
if you want to blame all time, I am not available for you…
if you want to crib all time, I am not available for you…
if my efforts went in vain by time, I am not available for you…
if my words are not enough on right time, I am not available for you…

It’s high time… Am actually not available for you…

~Niishtha – 14th Oct 2019

रूह…।।।

तेरी रूह की कशिश,तेरे प्यार का जुनून,
मुझे नहीं देखना..।।।
आज आकाश की गहराई को, अपने दिल की तन्हाई को,
मुझे नहीं देखना..।।।
देखी खूब तेरी मोहब्बत है, अब तेरी बेवफ़ाई को,
मुझे नहीं देखना..।।।
कहीं साहिल पर खोई मंज़िल को, और डूबती कश्ती की परछाई को,
मुझे नहीं देखना..।।।
अब तुझसे धोखा खाया है, पर हर इंसान की बुराई को,
मुझे नहीं देखना..।।।
तड़पते देखा है अपनी रूह को तेरे लिए,
लेकिन अब तू तड़पे….
मुझे नहीं देखना..।।।

~Niishtha – 12th Sep 2011

आँखे…!!!

ये आँखे…
सब सहती हैं, चुप रहती हैं।
कुछ कहती हैं, कुछ ख़ामोशी से समझा जाती हैं।
कभी हँसती हैं, कभी यू ही बह जाती हैं।

इनमे दर्द भी है, इनमे प्यार भी हैं!
इनमे ग़ुस्सा भी है, इनमे दुलार भी है।
इक ख़ामोश दरिया है, समुद्र सा तूफ़ान भी है।

ये आँखे…

गहराइयां ये नापती है, रूह तक में झांकती हैं।
कुछ ना इनसे छुपता है, सब कुछ तो इनको दिखता है।
पनाह ये देती है, मोतियों सा सजा लेती हैं।

कभी सुस्ताई आंखें, जुगनू सी चमकती है।
चाहत पूरी होने पर, धड़कनों पर थिरकती है।
दिल की खलिश में, हैरत सी मुस्कुराती है।

ये आँखे…

कितनी रंगीन है, दुनिया इन्हीं से ही हसीन है।
मन्न के अल्हड़ होने पर, शरारत सी कर जाती हैं।
कभी खोई सी रहती है, कभी मसरूफ सी हो जाती हैं।

आँखे ही तो है,  शाम होते होते ये भी थक जाती है।

13th Feb 2020

Collaboration with Tarun

Decency…!!!

when
he knows his abilities, yet lets her dominate him…
he always has shine, never let her face dim…
when he knows, he will never cross line without her permission….
he carries on relationship without pre-condition
when he has arrogance on face, yet tenderness in voice..
he always listens her with greatest rejoice..
when he caress her gently with twinkle in his eyes…
he always wants to be present whenever she cries…
when he believes in telepathy, yet superstitious..
he always feels positive and bring propitious…

he s man of his words, compassionate thoughts… clear view of life in this world …
where, he always wants to match his frequency… there he comes with hell lot of decency ….

~Nishtha -16th Feb 2020

बात…।।।

क्यों कहें वो बात जो हम खुद से खफा हो जाएं ,

क्या तुम नहीं जानते? क्या कहेंगे हम क्या कहोगे तुम?

बहुत सलीका है तुम्हें बात करने का.. तो चलो बात करो तुम,

कहनी बहुत शिकायतें है तुम्हें , तो चलो बात करें हम

जो मरासिम ही पहले जैसे ना रहे, क्या वो भी बात कहोगे तुम?

सीख आए हैं अब हम भी बात करना,

क्या अब मेरे जज़्बात सुनोगे तुम?

करनी है और कहनी है, बहुत बातें कहनी है

जो कभी ना कह सके, क्या वो सुन सकोगे तुम?

– मरासिम – Relation/Relationship

~Niishtha